डूबते सूरज का तबस्सुम

  अर्श-ए-सिफ़र से शनासाई थी मेरी... लेकिन आज डूबते सूरज का तबस्सुम देखा। मुरझाते फूल को हसते देखा। और तनहा पंछी को गाते सुना। अँधेरे के पंखों पर शरर-ए -ज़ीस्त को ठहरते देखा। बीते लम्हो का ज़िक्र नहीं था कही भी। ... खुदा की तोहमत नहीं थी कही! ए'तिमाद, रिफ़ाक़त, माज़रत का कही कोई निशाँ [...]

नया परवाज़

  यहाँ हर नुक्कड़ पे एक नया ख़ुर्शीद हर रात एक नया ख़्वाब और हर सुबह एक नया परवाज़ ... यहाँ से रोज़ सुबह एक क़ाफ़िला निकलता है तुम्हारे ख़ुल्द से मेरे बोसीदा फ़लक तक और क्या रखु मैं तवक़्क़ो तुमसे ए साक़ी जो मुक़म्मल है ज़िन्दगी इसी ताबीर-ए-ख़्वाब से !   Meaning of Urdu [...]